एक अजनबी चूत

हेलो फ्रेंड, मेरा नाम सिदार्थ है और मैं दिल्ली का रहने वाला हु. मेरी ऐज २५ इयर्स है एंड मैं एक कंपनी में इडीपी मेनेजर हु. दोस्तों, मुझे सेक्स स्टोरी पढने का बहुत शौक है. हलाकि स्टोरी बहुत सी फेक होती है. बट पढने में मजा आता है. अपनी स्टोरी बताने से पहले, मैंने आपको अपने बारे में बता दू. मेरी बॉडी स्लिम है और मेरे डिक का साइज़ ६ इंच है. मेरी हाइट ५.५ इंच है. देखने में सांवला हु.. मीन्स नॉट वाइट नॉट ब्लैक.

अब ज्यादा इंतज़ार ना करते हुए, अपनी स्टोरी पर आता हु. बात उन दिनों की है, जब मैंने जॉब किया ही था. मैं सुबह ऑफिस जाता और शाम को घर आता. बस इतनी ही थी मेरी लाइफ. मेरी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं थी, जिसके साथ मैं कहीं घुमने जा सकू. बस ऐसे ही चल रहा था. मैं हर रोज़ स्टैंड पर खड़ा होता और लडकियों को देखता. सभी अपने बॉयफ्रेंड के साथ होती थी. कुछ महीने ऐसे ही गुजर गए. फिर दिवाली का त्यौहार आने वाला था. हम सभी ऑफिस का स्टाफ दिवाली की तैयारी कर रहे थे. दिवाली से एक दिन पहले, मैं रोजाना के रूटीन की तरह स्टैंड पर खड़ा हुआ था.

तभी वहां एक लड़की आई. दिखने में बहुत खुबसूरत थी. फिगर भी ३२ – २८ – ३६ का था. मैं उसे देखता ही रह गया. वो रास्ता भटक गयी थी. वहां उस टाइम बहुत लोग थे, जिनसे वो रास्ता पूछ रही थी.. बट किसी को पता नहीं चल पा रहा था, कि वो जाना कहाँ चाहती है? फिर वो मेरे पास आई और मुझे पूछने लगी.. मुझे दिल्ली काँटोंमन बोर्ड जाना है. यहाँ से कौन सी बस मिलेगी? मैंने कहा – यहाँ से ७४० मिल जायेगी. जो आपको वहां उतार देगी. उसके बाद हम दोनों स्टैंड पर बैठ गए. करीबन १/२ घंटा बीत गया.. कोई बस नहीं आई. मैं उसके बस में चड़ने का इंतज़ार कर रहा था. फिर उसने मुझ से पूछा, कि ७४० की सर्विस कम है क्या? मैंने कहा – नहीं. लेकिन दिवाली का टाइम है. तो हो सकता है, कि सर्विस कम हो गयी हो. सॉरी.. इन साब बातो में, मैंने उसका नाम तो बताना ही भूल गया.. उसका नाम एलिन था.

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उसके बाद मैंने उसे बोला, आप मेरे साथ चलो. मैं आपको अपने घर के पास वाले स्टैंड से बैठा दूंगा. वहां से बस जाती है आपके स्टैंड पर. मैं उसको अपने साथ अपने घर के पास वाले स्टैंड पर ले गया. वहां पर भी काफी इंतज़ार करने के बाद जब बस नहीं आई, तो मैंने उसको बोला, कि चलो ऑटो कर लेते है. मैं आपको आपके स्टैंड पर छोड़ दूंगा. उसने कहा – ओके. मैंने ऑटो रुकवाया और उसके साथ उसको छोड़ने के लिए चला गया. उसने मुझे मना किया, कि आप रहने दो. मैंने उसको कहा, मैंने जिम्मेदारी उठाई है. तो निभानी तो पड़ेगी. फिर हम दोनों ऑटो में बैठे. उसने मुझे थैंक्स बोला और कहा, आप मेरे फ्रेंड बनोगे? मैंने कहा – हाँ. फिर उसने मुझे अपना नंबर दिया. मैंने उसकी हेल्प इंसानियत के नाते की थी. मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था. उसका नंबर मैंने मिलाया, तो वो ऑफ था. मुझे लगा, कि वो मुझे बेफ्कुफ़ बना रही है.

उसे छोड़ने के बाद मैं घर आया और उसे मेसेज भेजा. उसका कोई रिप्लाई नहीं आया. अगले दिन दिवाली थी. मैंने उसको सुबह से ले कर शाम तक कॉल किया. लेकिन उसका नंबर ऑफ था. मुझे लगा, कि वो मुझे बेफ्कुफ़ बना गयी. मैंने कॉल करना छोड़ दिया. दिवाली के नेक्स्ट डे, मुझे एक नंबर से कॉल आया. उसने मुझे कहा कि वो एलिन बोल रही है. मुझे तो यकीं ही नहीं हुआ. फिर हम दोनों फ़ोन पर बातें करने लगे. करीबन १ मंथ हम दोनों ने पूरी – पूरी रात बात की. उसे मुझ से प्यार हो गया था और मुझे भी. फिर मैंने एक दिन उसको पूछा – क्या तुमने पोर्न देखि है? उसने कहा – नहीं. मैंने कहा – मैं तुम्हे व्हात्सप्प कर देता हु. तुम देखना. बहुत अच्छी है और मैंने उसको भेज दिया. उसने पोर्न देखि और कहा – क्या हम भी यहीं करेंगे? मैंने कहा – हाँ, लेकिन शादी के बाद.

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फिर हम दोनों मिले और उसने मुझे कहा – मुझे सेक्स करना है तुम्हारे साथ. मैंने कहा – या, अभी बहुत टाइम है. उसने कहा – प्लीज. मैंने कहा – ओके. ठीक है. मेरे पास एक फ्रेंड के घर की चाबी है. वो दिल्ली से बाहर गया था. मैं उसे वहां ले गया. वहां जा कर हम दोनों फ्रेश हुए. मैं पहली बार सेक्स करने वाला था. समझ ही नहीं आ रहा था, कि कहाँ से शुरू करू? उसने फिर मुझे किस किया और हम दोनों एक दुसरे को किस करने लगे. मैंने उसकी टीशर्ट उतारी. उसने ब्रा नहीं पहनी थी. उसके बूब्स देख कर, मैं देखता ही रह गया. क्या गोल और मोटे – मोटे थे यार.. देखते ही अलग फीलिंग आ रही थी.

मैंने उसके बूब्स को चूसा.. क्या नरम बूब्स थे. वाह.. मैं उन्हें चूसने लगा.. वो सिसकिय भरने लगी अहः अहः अहाहहः अहहाह मैं चूसता रहा. वो एकदम लाल हो गए थे. फिर मैंने उसकी जीन्स को उतार दिया. उसने पेंटी भी नहीं पहनी थी. उसकी चूत देख कर तो मेरा लंड सलामी मारने लगा. क्या लाल चूत थी यार! एकदम क्लीन शेव और गोरी. मैंने उसको लेटाया और उसकी तंगी फैला कर उसकी चूत को चाटने लगा. क्या नमकीन चूत थी उसकी. वो सिस्कारिया भर रही थी. फिर हम दोनों कब ६९ की पोजीशन में आ गए, पता ही नहीं चला? वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत को चाट रहा था. करिबन आधा घंटा ऐसा ही करने के बाद हम दोनों एक दुसरे के मुह पर ही झड़ गए.. उसके पानी मस्ती टेस्टी था.

५ मिनट रेस्ट करने के बाद, मैंने उसको किस किया और करता रहा. मैंने लंड फिर से तैयार किया और वो भी गरम हो चुकी थी. अब मैं उसके ऊपर आ गया. मैंने उसकी कमर के नीचे एक पिलो लगा दिया. वो कहने लगी, प्लीज और मत तड़पाओ.. मेरी चूत फाड़ दो. मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और गुसाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन लंड घुस ही नहीं रहा था. मैंने उस से कहा, इसे गीला करो. तो उसने मेरे लंड को अपने मुह में ले लिया और पूरा गीला कर दिया. क्या मस्त फीलिंग थी यारो. फिर मैंने एक बार और लंड को चूत पर रखा और धक्का मारा. मेरे लंड का टोपा थोडा सा अन्दर घुस गया. उसकी चीख निकल गयी. उसकी आँखों से आंसू निकल गए. मैंने एक और धक्का मारा और आधा लंड उसकी चूत में घुस गया. वो जोर – जोर से से चिल्ला रही थी. मैंने अपने होठ उसके होठो पर रख दिए और एक और झटका मारा. फिर मैं उसके ऊपर लेट गया. अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस चूका था. कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद, मैंने अपना लंड धीरे – धीरे हिलाना शुरू किया. मैंने फिर उसको पूछा – कैसा लग रहा है? उसने कहा – अच्छा लग रहा है.

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अब मैंने अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. वो सिस्कारिया भर रही थी ऊओह्ह .. एस… ऊह्ह्होह…. अहहाह… तेज करो. फाड़ दो… फाड़ दो मेरी चूत को… प्लीज जोर – जोर से करो… मैंने भी जोर से झटके मारने शुरू कर दिए. वो भी एस – एस – कर रही थी.. उसकी चूत खून में सनी हुई थी.. मैं उसे चोदे जा रहा था. कोई आधा घंटा ये सब करने के बाद हम दोनों झड़ गए और लेट गए. थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद, हम दोनों उठे. बेडशीट पूरी गन्दी हो गयी थी हम दोनों के कम से और खून से.. हम दोनों ने फिर एक दुसरे को साफ़ किया और कपडे पहन कर चले गए. स्टोरी कैसी लगी, जरुर बताना…

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